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Saturday, January 1, 2011

धरती के लिए कैसी मुसीबत!

धरती के लिए कैसी मुसीबत!



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उसको सभी महापुरुष कहते थे।वह धर्म के साथ इतना जुड़ा हुआ दिखता था कि सभी उसको भगवान ही मानते थे।


उसका मनोविज्ञान का ज्ञान अद्भुत था।उसका प्रयोग करके वह मानव को संमोहित करता था।उसने उसके अहंकार को पुष्ट करने के लिए अनेक को मानसिक पंगुता दी थी-वह भी धर्म के नाम पर।


मृत्यु के बाद उसको नर्क में ड़ाला गया।


'मैंने बहुत धर्म का प्रचार किया है।कई लोगों को धर्माभिमुख किया है।मेरे लाखों अनुयायीओं आज भी धर्म का प्रचार कर रहे है।तो भी मुझे स्वर्ग के बजाय नर्क में क्यों ड़ाला गया है?'उसने नर्क के व्यवस्थापक को सवाल किया।


'धर्म के नाम पर इस व्यक्ति ने अधार्मिकता का प्रचार किया है।उसने कई लोगों को मानसिक पंगु बनाया है।इसको नर्क के सब से कनिष्ठ कोने में जगह दी जाय।'नर्क के व्यवस्थापक ने मृत्युदेव की नोंध बताई।


तभी कई महापुरूष की दरखास्त आईः'हमारे लिए तो स्वर्ग और नर्क दोनों समान है।हम सभी से पर है।जिसको स्वर्ग में आने की ईच्छा हो उसको हमारे बदले में आने दो।हम नर्क में जाने के लिए तैयार है।'


उन महापुरुषों की बात मृत्युदेव ने मान ली।


सभी महापुरूष नर्क में आएँ।नर्कवासीओं में उनकी उपस्थिति ने महोत्सव का रूप ले लिया।सभी के मुँह पर सर्वोत्तम चमक आने लगी।


वे धरती के महापुरूष और उनके अनुयायीओं को स्वर्ग के महापुरूषों की ईच्छा से स्वर्ग में प्रवेश दिया गया।


स्वर्गवासीओं को उनकी उपस्थिति हैरान करने लगी।


तब से मृत्युदेव ऐसे मानव का क्या करना चाहिए?इस बात पर विचार कर रहे है।जब तक इस बात का योग्य समाधान न मिले तब तक ऐसे महापुरुषों को धरती पर ही रखना ऐसा तय किया है मृत्यु देवने।


धरती के लिए कैसी मुसीबत!


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